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CAG ने इन 11 पैमानों के आधार पर नरेंद्र मोदी की राफेल डील को सस्ता बताया

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Rafale डील पर CAG की रिपोर्ट राज्य सभा में पेश हो गई. अपनी रिपोर्ट में CAG ने कहा है कि UPA सरकार के मुकाबले नरेंद्र मोदी सरकार ने 2.8 फीसदी सस्ता सौदा किया है. CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि NDA ने अपनी डील में इंडिया स्पेसिफिकेश एनहांसमेंट (India specification enhancements) में करीब 17 फीसदी की बचत की है. India specification enhancements के मायने उन उपकरणों से है जो सरकार अपने दुश्मन देशों से छिपाकर खरीदती है.

मसलन किसी खास तरह का राडार या मिसाइल. सरकार ने इस मामले में डील सस्ती की है. अगर हम ओवरऑल डील की बात करें तो 2007 के बेंचमार्क के मुकाबले 2016 की यह डील सस्ती है.  CAG ने 11 पैरामीटर के हिसाब से नरेंद्र मोदी सरकार की राफेल डील को सस्ता बताया है. ये पैरामीटर ये हैं.

-फ्लाइवे एयरक्राफ्ट पैकेज

-सर्विस प्रोडक्ट्स

-इंडियन स्पेसिफिक एनहांसमेंट

-स्टैंडर्ड ऑफ प्रीपरेशन

– इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज

-परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स

-टूल्स, टेस्टर्स और ग्राउंड इक्विपमेंट्स

-वेपंस पैकेज

-रोल इक्विपमेंट

-पायलट और टेक्निशियन की ट्रेनिंग

-स्टीमुलेटर और स्टीमुलेटर ट्रेनिंग

CAG का कहना है कि NDA की डील न सिर्फ सस्ती है बल्कि उसमें फास्ट डिलीवरी की भी शर्त है. 2007 में जो डील हुई थी उसके मुताबिक, पहले 18 एयरक्राफ्ट 37 महीने से 50वें महीने के बीच डिलीवर होती. इसके बाद 18 एयरक्राफ्ट की डिलीवरी 49वें महीने से लेकर 72 महीने तक होती.

 

इन 18 एयरक्राफ्ट की जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की थी. NDA की डील के मुताबिक पहले 18 एयरक्राफ्ट की डिलीवरी 24 महीनों में होगी और बाकी के 18 राफेल एयरक्राफ्ट की डिलीवरी 36 महीनों में होगी.

UPA के मुकाबले NDA सरकार की राफेल डील कितना सस्ता कितना महंगा?

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